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हम जनता भी क्या करे?


हमारे पास भी कोई नया चेहरा या पार्टी ऐसा नहीं दिख रहा है जो एक साफ सुथरी छवि वाली हो। यह सच की हम जनता कही न कही ठग का शिकार हो रहे है। कभी कोई तो कभी कोई पार्टी हमे मुर्ख बना कर ठग लेती है।
इन्ही सबका मजा लेते है हमारे राजनेता , नहीं तो हम भी कब का हंगामा कर  दिए होते इस सिस्टम के खिलाफ ,
पर हमने किया या देखा भी दिल्ली में, अन्ना आंदोलन  में , लोकपाल बिल के लिए। वहां क्या हुआ ? एक पार्टी वहां  से भी जन्म ले ली और वी भी सत्ता के लालच में इधर -उधर भटकना करना शुरू कर दिया।



कभी ये सरकार हमे टार्गेट देती है ,तो कभी हमे राजा बनाने का सपना दिखाती है । नहीं बना ... हमे राजा लेकिन कम से कम ऐसा तो कर  दो जिसे हम दो वक्त का रोटी का जुगाड़ खुद से कर ले ,मुझे आपस में मत लड़ने दो ,हमने बहुत लड़ाई पहले भी की है ,और नतीजा हमने देखा है। क्यों करते हो ,तुम नेता ऐसा ,हमे आपस में तोड़ने के लिए ,सुनो में हम नहीं टुटने वाले ,अब हम लोग  तेज हो गए है। अब हम न तो जातीवाद के लिए ,नहीं आरक्षण के लिए लड़ने वाले क्योकि हमे अब सब समझ आ चूका है।

ये टीवी वाले भी खूब करते है मेरा दिमाग का दही  कर देते है ,कहते है हमसे कि मै दिखा रहा हु पॉजिटिव खबर और दिखाते है।  हमे दो भाइयो का लड़ाई ,इसलिए हम जनता को तुमलोगो पर से भरोसा उठ गया है ,सही है  कम से कम तुम लोग अपना कमाई कर लो। हम जनता सबकुछ जान चुके है। पर हम जनता क्या करे ?

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