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एक भारत ,एक परिवार

हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाइ   ..... चार धर्मो का देश है हिंदुस्तान। जिन्हे कुछ  नेता या यु कहे कुछ लोग अपने बाप के जागीर समझ बैठे है। ये जो भारत है न ,बहुत ही भोली है यहाँ के जनता, जो एक इशारे पर कुछ करने को तैयार हो जाती है.,कुछ पढ़े लिखे लोग  अपने बात को रखने के लिए इन जनता को को आगे करती है। फिर अपना पैसा और सम्मान बढाती  है। मर जाते है, तो किसी का बाप ,किसी का भाई ,क्या मिलता है मरने के बाद ,पता नहीं।
उस गरीब से जाकर पूछो जिसे खाने के लिए रोटी नहीं है ,उस बेरोजगार से जाकर पूछो जिसे नौकरी अगर मिल जाये तो ,उसके नौकरी से कितने लोगो का पेट चलेगा। मजहब ,मस्जिद -मंदिर से इन्हे कुछ लेना -देना नहीं है।
लेकिन मूद्दा जो होना चाहिए वो नहीं है ,मुद्दा है तो मंदिर -मस्जिद का।

हर धर्म में  अच्छे -बुरे लोग है। किसी धर्म में अच्छाई का प्रितशत ज्यादा है ,तो किसी में बुराई का। न  फातिमा  जिन्दा है , न दुर्गा ,न ही मेरी। जो जिन्दा है उसका तो इज़्ज़त नहीं संभाला जा रहा है यहाँ के लोगो से , जो है ही नहीं  उसका चर्चा बड़े  जोर -शोर से लोगो को सुनाई  और  दिखाई  दे रहा है।
आपने समाज ऐसा बनाकर रख दिया है ,कि  आप अपने बेटी को अकेले कही नहीं छोड़ सकते ,और ऐसे लोग फातिमा ,पद्मावती ,दुर्गा ,मेरी  , पर बहस कैसे करते है ,समझ नहीं आता।


कोई नेता बताये कि मेरे राज्य  में एक भी बलात्कार नहीं हुआ है  .,एक भी युवा बेरोजगार नहीं है।  ऐसा कोई  नहीं मिलेगा। लेकिन हिन्दू -मुस्लिम  में खून का वर्षा करना हो, तो देखो  कैसे अपने बिल से निकलते है ,अपनी -अपनी रोटी सेकने के लिए।


न हिन्दू देश छोड़ने जा रहा है ,न मुस्लिम देश छोड़ने जा रहा है , ऐसे नेता जो इन्हे छुडवाने की बात  पर रोटी सेकते  है ,अच्छा होता है  जुड़वाने पर जोर देते।

मेरे भी दोस्त है जों कुछ #ब्राह्मण ,कुछ #यादव ,कुछ #दलित ,कुछ #राजपूत,कुछ #भूमिहार ,कुछ #कयस्थ ,कुछ #मुसलमान भी  है ,लेकिन हमारे बीच  कभी जुबान पर  न तो कभी जाती ,न ही धर्म शब्द आया। ऐसा इसलिए क्योकि हमारे दोस्तों को  ये जो भारत है ,वो पता है।


समाज किस दिशा और दशा में लाकर आप छोड़ोगे शायद आपको भी पता नहीं होगा।



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