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नवंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एक भारत ,एक परिवार

हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाइ   ..... चार धर्मो का देश है हिंदुस्तान। जिन्हे कुछ  नेता या यु कहे कुछ लोग अपने बाप के जागीर समझ बैठे है। ये जो भारत है न ,बहुत ही भोली है यहाँ के जनता, जो एक इशारे पर कुछ करने को तैयार हो जाती है.,कुछ पढ़े लिखे लोग  अपने बात को रखने के लिए इन जनता को को आगे करती है। फिर अपना पैसा और सम्मान बढाती  है। मर जाते है, तो किसी का बाप ,किसी का भाई ,क्या मिलता है मरने के बाद ,पता नहीं। उस गरीब से जाकर पूछो जिसे खाने के लिए रोटी नहीं है ,उस बेरोजगार से जाकर पूछो जिसे नौकरी अगर मिल जाये तो ,उसके नौकरी से कितने लोगो का पेट चलेगा। मजहब ,मस्जिद -मंदिर से इन्हे कुछ लेना -देना नहीं है। लेकिन मूद्दा जो होना चाहिए वो नहीं है ,मुद्दा है तो मंदिर -मस्जिद का। हर धर्म में  अच्छे -बुरे लोग है। किसी धर्म में अच्छाई का प्रितशत ज्यादा है ,तो किसी में बुराई का। न  फातिमा  जिन्दा है , न दुर्गा ,न ही मेरी। जो जिन्दा है उसका तो इज़्ज़त नहीं संभाला जा रहा है यहाँ के लोगो से , जो है ही नहीं  उसका चर्चा बड़े  जोर -शोर से लोगो को सु...

कितना बदल गए है हम

आज भाग -दौड़ भरी जिंदगी में लोग इतने दूर होते जा रहे है कि अपनों के लिए हमे दुसरे के बनाये तकनीक पर आश्रित होना पड़ता है। चाहे माध्यम कोई भी हो। एक समय था जब हम साथ बैठ कर खाते थे। एक दूसरे  का मजाक उड़ाया करते थे। न जाने क्या -क्या कह देते थे ,लेकिन समय के अनुसार ,हम सभी जिम्मेवारी लेते गए, और अपनों  को एक छोटा सा डिब्बा बंद करते  चले गये । जिस डिब्बा का हम सभी एक मोबाइल ,आईफोन और न जाने किस-किस  नाम से जानते है।  लोग कहते है तकनीक जो है अपनों को मिलता है,लेकिन यह सत्य नहीं है। यह हमे और दूर करते जा रहा है अपनों से ,चाहे दोस्त हो या फिर सगे सम्बन्धी। आपको याद है आप सभी दोस्त लास्ट टाइम कब एक साथ खाना खाये थे ? , चलिए यह बातये की आप  सभी परिवार एक साथ कब मिले ?शायद पता नहीं ,अगर पता भी होगा तो एक वक़्त बीत गया होगा।  अगर आज यह तकनीक नहीं होता ,तो शायद यह संभव हो पता। 

कितना फर्क पड़ता है इस दौर के आंदोलन से .........

''आंदोलन ''शब्द का परिभाषा खोजने और जाने की इच्छा हुई ,फिर भारतके अंदर हो रहे है ,आंदोलन को समझने की कोशिश किया। मै जो समझ सका वो यह है कि जब भी समाज के अंदर  शोषण और अन्याय  होता है और इसके खिलाफ में  संगठित रूप से लोगो के द्वारा उठाये गए आवाज़ को ''आंदोलन ''कहते है। लेकिन उस आंदोलन  किस  एक  वयक्ति विशेष  को ही लाभ  मिल पता है। शायद यही कारण आज के माजूदा सरकार  को किसी भी आंदोलन से कोई फर्क नहीं पड़ता।  पिछले कुछ वर्षो  से जो भारत में आंदोलन हुए है ,जो है - १. भारत स्वाभिमान आन्दोलन -2011- ‘भारत स्वाभिमान आन्दोलन’ कालेधन के विरुद्ध खड़ा किया गया एक विशाल जनांदोलन था जिसकी अगुवाई बाबा रामदेव ने किया था।  लेकिन उस समय कांग्रेस की सर्कार थी।  कांग्रेसी सरकार ने पुलिस बल द्वारा इसे जबरन तुडवा दिया। २. जनलोकपाल बिल – एंटी करप्शन आन्दोलन -2011- साल 2011 में ही प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर मंतर पर जनलोकपाल बिल के लिए भूख हड़ताल शुरू की, जिसके समर्थन में पूरा देश एकजुट हुआ |   इस...