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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

देश के मुलभुत समस्या से ..दूर सरकार

हमारे प्रधानमंत्री जी ७० साल  को वयवस्था को ५ साल में बदलना चाहते है ,और शायद यही कारण की प्रधानमंत्री जी पुरे देशवासियो ये ३. ५ साल से  सिर्फ गोल -गोल घुमा रहे है  , हम जनता जाना चाहते है.कौन -सा मिशन , ५ साल में इन्होने पूरा कर  दिया या फिर अगले चुनाव के लिए बना रहे है। किसी एक मिशन को ५ साल में १००% न सही ९९% ही कर  देते ।  सिर्फ घोषणा ही हुआ है ,  देश के मुलभुत समस्या है ,अशिक्षा ,गरीबी ,बेरोजगारी,कुपोषण ,भुखमरी .... जिसे आज की  भी सरकार दूर नहीं कर पायी  है। बात हम डिजिटल इंडिया की करते है। जनता जो इन समस्या के लपटे में है उन्ही के वोट से सरकार  बनती है , न कि डिजिटल इंडिया के सपने देखने वाले लोगो से। देश में कुछ लोगो के सुखी रहने से पूरा देशवासियो सुखी कैसे समझ लेती है ,सरकार। वर्तमान सरकार को यह जरूर समझना चाहिए की जीत उनकी वहां से तय होती है  ,जहां  के लोग आज भी  फेसबुक ,ट्विटर नहीं चलना  जानते हैं ,इसलिए इन जगहों पर खर्च करने के बजाये, उन जगह पर खर्च करे, जहां आज भी लोग घर में दीया जलने पर दिवाली और...

देश चलाने का नया राष्ट्रवादी तरीका

1.जब 50 लाख नए रोजगार पैदा करने की जगह हर साल 2 लाख नौकरियाँ खत्म होने की नौबत आ जाये तो जोर जोर से भारत माता की जय,भारत माता की जय चिल्लाना शुरू करें। जनता खुश हो जाएगी और लोगों को एक नया रोजग ार मिल जायेगा। 2.जब 350 करोड़ विदेशी दौरों में खर्च करने के बाद,पैसे देकर मोदी-मोदी चिल्लाने के बाद भी, तीन साल में एक बड़ा विदेशी निवेशक भारत आने को तैयार न हो तो प्रेमी जोड़ों को पकड़कर कूटने लगिये।जनता को लगेगा कि कम से कम सरकार भारतीय संस्कृति को तो बचा रही है। 3.जब आयात घटने लगे,पुराने मित्र देश दुश्मन देश से करीबी बढ़ाने लगें,पर्यटन चौपट होने लगे,विदेशों में भारत की तुलना सूडान और नाइजीरिया से की जाने लगे तो तीन तलाक पर बहस शुरू कर दीजिए।लोगों को लगेगा कि सरकार मुस्लिमों को तो सीधा कर ही देगी,भले और कुछ करे या न करे। 4.जब सरकारी रिपोर्ट कहने लगे कि भ्रष्टाचार 67 फीसदी बढ़ गया तो गाय लेकर जाने वालों को जान से मारना शुरू कर दीजिए।सब समझेंगें ये लोग कम से कम गौ सेवा तो कर ही रहे हैं। 5.जब सैकड़ों करोड़ खर्च करने के बाद भी नदियाँ ज्यों की त्यों रहें तो उनकी परिक्रमा और आरती का आडम्बर शुरू कर दीजिए,...

हम जनता भी क्या करे?

हमारे पास भी कोई नया चेहरा या पार्टी ऐसा नहीं दिख रहा है जो एक साफ सुथरी छवि वाली हो। यह सच की हम जनता कही न कही ठग का शिकार हो रहे है। कभी कोई तो कभी कोई पार्टी हमे मुर्ख बना कर ठग लेती है। इन्ही सबका मजा लेते है हमारे राजनेता , नहीं तो हम भी कब का हंगामा कर  दिए होते इस सिस्टम के खिलाफ , पर हमने किया या देखा भी दिल्ली में, अन्ना आंदोलन  में , लोकपाल बिल के लिए। वहां क्या हुआ ? एक पार्टी वहां  से भी जन्म ले ली और वी भी सत्ता के लालच में इधर -उधर भटकना करना शुरू कर दिया। कभी ये सरकार हमे टार्गेट देती है ,तो कभी हमे राजा बनाने का सपना दिखाती है । नहीं बना ... हमे राजा लेकिन कम से कम ऐसा तो कर  दो जिसे हम दो वक्त का रोटी का जुगाड़ खुद से कर ले ,मुझे आपस में मत लड़ने दो ,हमने बहुत लड़ाई पहले भी की है ,और नतीजा हमने देखा है। क्यों करते हो ,तुम नेता ऐसा ,हमे आपस में तोड़ने के लिए ,सुनो में हम नहीं टुटने वाले ,अब हम लोग  तेज हो गए है। अब हम न तो जातीवाद के लिए ,नहीं आरक्षण के लिए लड़ने वाले क्योकि हमे अब सब समझ आ चूका है। ये टीवी वाले भी खूब करते है मेरा दिमाग ...

बेरोजगार पत्रकार का फायदा कही न कही फायदा उठा रही ,मीडिया को चलने वाले पूँजीपति।।।।।।।।।।।।।।

अगर आज सोशल मीडिया नहीं होता , तो ये बेरोजगार पत्रकार अपने मन की भड़ास नहीं निकल पाते , जो यह टीवी ,या अखबारों में नहीं लिख और बोल पाते है। ये  सच है  कि  जब आप किसी भी क्षेत्र में रूचि से पढ़ाई करते है और पढ़ाई खत्म करने  बाद जब आप रोजगार के तलाश में लगते है, तो आपको  कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता ,जिसका फायदा कही  न कही पूँजीपती, या यु कहे कि पैसे वाले आपसे उठाते है।  चाहे आपका कोई प्रोफेशन क्यों नहीं हो? इन्ही प्रोफेशन में एक मीडिया भी प्रोफेशन है ,जिसमे कुछ पत्रकारों के सहारे ,पुरे देश के अजेंडा को तय किया जाता है ,वो पत्रकार ईमानदार तो है ,पर उसके भी हमारे -आपके जैसे परिवार होते है। जिसे इस समाज में वो सभी सुविधाएं चाहिए ,जो हम सभी को चाहिए।   और  यही कारण है वे अपने ज्ञान को पीछे की और ढकेल कर ,वो लिखने -बोलने के लिए मजबूर होते है , जो उनसे  कहा जाता है। क्योकि पैसो की जररूत आज हर किसी को है।  यह हमारे समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है ,हमलोग इसे आसानी से देखते और समझ भी जाते है।