आज भाग -दौड़ भरी जिंदगी में लोग इतने दूर होते जा रहे है कि अपनों के लिए हमे दुसरे के बनाये तकनीक पर आश्रित होना पड़ता है। चाहे माध्यम कोई भी हो। एक समय था जब हम साथ बैठ कर खाते थे। एक दूसरे का मजाक उड़ाया करते थे। न जाने क्या -क्या कह देते थे ,लेकिन समय के अनुसार ,हम सभी जिम्मेवारी लेते गए, और अपनों को एक छोटा सा डिब्बा बंद करते चले गये । जिस डिब्बा का हम सभी एक मोबाइल ,आईफोन और न जाने किस-किस नाम से जानते है।
लोग कहते है तकनीक जो है अपनों को मिलता है,लेकिन यह सत्य नहीं है। यह हमे और दूर करते जा रहा है अपनों से ,चाहे दोस्त हो या फिर सगे सम्बन्धी। आपको याद है आप सभी दोस्त लास्ट टाइम कब एक साथ खाना खाये थे ? , चलिए यह बातये की आप सभी परिवार एक साथ कब मिले ?शायद पता नहीं ,अगर पता भी होगा तो एक वक़्त बीत गया होगा।
अगर आज यह तकनीक नहीं होता ,तो शायद यह संभव हो पता।
लोग कहते है तकनीक जो है अपनों को मिलता है,लेकिन यह सत्य नहीं है। यह हमे और दूर करते जा रहा है अपनों से ,चाहे दोस्त हो या फिर सगे सम्बन्धी। आपको याद है आप सभी दोस्त लास्ट टाइम कब एक साथ खाना खाये थे ? , चलिए यह बातये की आप सभी परिवार एक साथ कब मिले ?शायद पता नहीं ,अगर पता भी होगा तो एक वक़्त बीत गया होगा।
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