अगर आज सोशल मीडिया नहीं होता , तो ये बेरोजगार पत्रकार अपने मन की भड़ास नहीं निकल पाते , जो यह टीवी ,या अखबारों में नहीं लिख और बोल पाते है।
ये सच है कि जब आप किसी भी क्षेत्र में रूचि से पढ़ाई करते है और पढ़ाई खत्म करने बाद जब आप रोजगार के तलाश में लगते है, तो आपको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता ,जिसका फायदा कही न कही पूँजीपती, या यु कहे कि पैसे वाले आपसे उठाते है।
चाहे आपका कोई प्रोफेशन क्यों नहीं हो? इन्ही प्रोफेशन में एक मीडिया भी प्रोफेशन है ,जिसमे कुछ पत्रकारों के सहारे ,पुरे देश के अजेंडा को तय किया जाता है ,वो पत्रकार ईमानदार तो है ,पर उसके भी हमारे -आपके जैसे परिवार होते है। जिसे इस समाज में वो सभी सुविधाएं चाहिए ,जो हम सभी को चाहिए। और यही कारण है वे अपने ज्ञान को पीछे की और ढकेल कर ,वो लिखने -बोलने के लिए मजबूर होते है , जो उनसे कहा जाता है। क्योकि पैसो की जररूत आज हर किसी को है।
यह हमारे समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है ,हमलोग इसे आसानी से देखते और समझ भी जाते है।

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